कवि-सम्मेलन में हुआ बड़ा तमाशा एक |
वीर रसीय कविवर पिटे, पुलिस, भीड़ रही देख ||
पुलिस, भीड़ रही देख मंच पै गुंडे चढ़ गए |
काव्य-धार फूटी जिस मुख से घूँसे जड़ गए ||
कहे 'शून्य' नर-नारी, बच्चो, युवक औ' बूढ़ो |
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वालों को ढूँढ़ो ||
- शून्य आकांक्षी
( राजस्थान पत्रिका समाचार, 29 / 09 / 2011, नैनवा, बूंदी, राजस्थान )
वीर रसीय कविवर पिटे, पुलिस, भीड़ रही देख ||
पुलिस, भीड़ रही देख मंच पै गुंडे चढ़ गए |
काव्य-धार फूटी जिस मुख से घूँसे जड़ गए ||
कहे 'शून्य' नर-नारी, बच्चो, युवक औ' बूढ़ो |
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता वालों को ढूँढ़ो ||
- शून्य आकांक्षी
( राजस्थान पत्रिका समाचार, 29 / 09 / 2011, नैनवा, बूंदी, राजस्थान )
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